अब किसी भी स्कूल में दाखिला लेने के लिए एसएलसी नहीं होगी अनिवार्य

 सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने के इच्छुक प्राइवेट स्कूलों के छात्र-छात्राओं को अब स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट के लिए निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। हरियाणा सरकार ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों में दाखिले के लिए एसएलसी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है। 


अब बच्चे राज्य के किसी भी स्कूल में बिना एसएलसी ऑनलाइन दाखिला ले सकेंगे। विद्यालय शिक्षा निदेशालय द्वारा बगैर एसएलसी के प्रवेश देने हेतु एमआईएस में आवश्यक संसोधन कर दिया गया है। निदेशालय के इस कदम से अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है।एक स्कूल को छोड़कर दूसरे स्कूल में प्रवेश के इच्छुक छात्रों को पहले एसएलसी प्रस्तुत करना होता था। 

निजी स्कूल संचालकों की ओर से एसएलसी की एवज में प्रताड़ित किए जाने की भी शिकायतें आई थी। हद तो तक हो गई जब कोरोना काल के दौरान बंद पड़े स्कूलों में बच्चों के ना आने पर भी प्राइवेट स्कूल संचालकों ने अभिभावकों पर स्कूल की पूरी फीस देने का दबाव डालना शुरू कर दिया। अभिभावक इस परेशानी से अभी जुझ ही रहे ‌थे की शिक्षा निदेशालय द्वारा एसएलसी की अनिवार्य को खत्म करते हुए दाखिला लेने के निर्देश जारी हुए। 

इसी के चलते अभिभावकों ने प्राइवेट स्कूलों की मोटी फीस से बचने व बच्चों का एक साल खराब होने से बचाने के लिए अपने पास के सरकारी स्कूलों में दाखिला करवाना शुरू कर दिया। इन में उन परिवारों के बच्चे अधिक थे जिनका कोरोना काल में रोजगार छिन गया था। ओर अब वह परिवार कोरोना काल में प्राइवेट स्कूलों की फीस भरने में अ‌स्मर्थ थे। 

‌अभिभावकों अब समझ नहीं आ रहा था कि वह बच्चों की अगामी शिक्षा किस तरह करवाएं क्योकि प्राइवेट स्कूल संचालक बिना फीस के उन्हे अगली कक्षा में प्रमोट करने से इंकार कर रहे थे। 

लिहाजा महंगी शिक्षा से छुटकारा पाते हुए वह सरकारी स्कूलों में दाखिले के लिए बढ़त बनाने लगे मगर प्राइवेट स्कूलों ने ऐसे बच्चों को स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट जारी करने से मना कर दिया था जिस कारण उनका सरकारी स्कूलों में दाखिला अटक गया था तब सरकार ने दी जारी करके एसएलसी के अनिवार्यता को खत्म कर दिया था 

यह भी आदेश जारी किए थे कि अगर प्राइवेट स्कूल सरकारी स्कूल में दाखिला लेने वाले बच्चों का 15 दिन में एसएलसी जारी नहीं करेंगे तो उसे 15 दिन बाद जारी हुआ मान लिया जाएगा मगर बाद में सरकार ने प्राइवेट स्कूलों के दबाव में वह आदेश वापस ले लिए थे। शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी एसएलसी के बिना दाखिले के आदेशों के बाद कोरोना काल में बंद पड़े स्कूलों को एक बहुत बड़ा झटका लगा। 

प्राइवेट स्कूल संचालक बच्चों को अगली कक्षा में प्रमोट ना करने का डर दिखाकर अभिभावकों से स्कूल की फीस वसूलने का काम कर रहे थे। शिक्षा निदेशालय के एसएलसी वाले आदेशों के बाद अब ‌अभिभावकों के पास दूसरा विकल्प सरकारी स्कूलों में दाखिले बचता था। जिसके बाद प्राइवेट स्कूलों में फीस आना बंद हो गई। हरियाणा की प्राइवेट स्कूलों की संस्थाओं ने सरकार की ओर रूख किया। जिसके बाद शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों में दाखिले के ‌एसएलसी की अनिवार्य के निर्देश दोबारा से लागू कर दिए। 

पहले के आदेशों में सरकार ने 15 जून 2020 के आसपास एसएलसी की अनिवार्यता समाप्त करने के आदेश जारी किए थे लेकिन महज 15 दिन बाद ही प्राइवेट  स्कूल संचालकों के दबाव में आदेश वापस ले लिए थे और एसएलसी की अनिवार्यता को लागू कर दिया था। जिसे लेकर सरकार सहित विभाग की खासी किरकिरी भी हुई थी। खैर इस बार जारी सरकार के इन आदेशों से लाखों बच्चों को राहत पहुंचने की संभावना है। 

जिसे लेकर सरकार ने राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों सहित मौलिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भी जारी कर दिया है। जिसमें कहा है कि स्कूलों में बिना एसएलसी वाले बच्चों के लिए एमआईएस अद्यतन की व्यवस्था पोर्टल पर संभव है। बच्चों को पूर्व में जो एसआरएन स्टूडेंट रजिस्ट्रेशन नंबर जारी किए गए हैं। उनमें विभाग द्वारा उपलब्ध करवाए गए विशेष प्रदान कर करके एमआईएस अपडेट करना संभव है। हालांकि इन आदेशों के बाद प्राइवेट स्कूल संचालकों को अगामी सत्र में परेशानी हो सकती है।