जिले में रूका विकास कार्य, साढ़े 12 करोड़ के टेंडर को दी कोर्ट में चुनौती

 सिरसा। सिरसा के नगर परिषद में 124 गलियों के टेंडर कमेटी के प्रिय ठेकेदारों को दिए जाने के विवाद में ठेकेदारों ने पंजाब और हरियाणा कोर्ट में याचिकादायर की है। इस मामले को लेकर कोर्ट ने सिरसा प्रशासन, नगर परिषद को जवाब देने के‌ निर्देश दिए है। 

गलियों के ‌इस मामले की सुनवाई अगामी 20 अप्रैल 2021 को होगी। वहीं इसी मामले को लेकर जिला नगर आयुक्त संगीता तेतरवाल ने भी एक कमेटी का गठन करके जांच शुरू की है। ऐसे में 124 गलियों के टेंडर खोलने के बाद इनके वर्क ऑर्डर जारी करने परअब पेच फंस सकता है।

नगर परिषद में 25 फरवरी को कुछ ठेकेदारों ने नगर परिषद के अधिकारियों पर अन्य ठेकेदारों से मिलीभगत करके उनके टेंडर रद्द करने के आरोप लगाए थे। ठेकेदारों ने इसी के चलते एक दिन धरना भी दिया। गलियों के टेंडर को लेकर नगर परिषद के जवाब से अंसतुष्ट ठेकेदार राजेंद्र पाल जिंदल, दीपक ने कोर्ट में अपनी याचिका दायर की है। 

कोर्ट ने सिरसा नगर परिषद से जवाब मांगा है। इस मामले को लेकर ठेकेदार राजेंद्र जिंदल व कुलदीप ने स्टेट विजिलेंस ब्यूरो हरियाणा को भी शिकायत की है। जिस पर विजिलेंस ने इस मामले पर संज्ञान ले लिया और कार्रवाई शुरू कर दी हैं। 

स्थानीय निकाय व शहरी विभाग के निदेशक और जिला नगर आयुक्त संगीता तेतरवाल ने भी एक कमेटी का गठन करके जांच शुरू की है और इस मामले को लेकर काफी गंभीर दिखाई दे र‌ही है। अनुमान है कि ऐसे में 124 गलियों के टेंडर का वर्क अलॉटमेंट करने के काम रूक सकता है। हालांकि नगर परिषद के अधिकारियों ने ठेकेदारों को टेंडर जारी करने के बाद इसकी फाइनेंशियल अप्रूवल के लिए फाइल मुख्यालय के पास भेजी है, क्योंकि साढ़े 12 करोड़ रुपये की लागत से गलियों का निर्माण होना है।

आपको बता दें कि यह हैं पूरा मामला

शहर की करीब 300 गलियां बनाने का प्रस्ताव करीब तीन साल पहले 2018 हाउस मीटिंग में पास हुआ था। नगर परिषद की एमई शाखा ने 2021 के फरवरी माह में ही 124 गलियों के निर्माण के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए थे। लगभग साढ़े 12 करोड़ के इस कार्य के लिए कई ठेकेदारों द्वारा विधिवत टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई थी। 

इस मामले को लेकर ठेकेदार राजेंद्रपाल जिंदल, विजय कूमार, कुलदीप सिंह, दीपक कुमार, दीपक, राकेश कुमार का आरोप था कि गलियों के टेंडर नगर परिषद कार्यालय में खोलने की बजाए नगर परिषद के ईओ की कोठी में ही खोले ‌दिए और अपने जिन नजदीकी ठेकेदारों के टेंडर खोलने थे, केवल उन्हीं ठेकेदारों को कोठी पर बुलाया गया था। अन्य आवेदन करने वालें ठेकेदारों को टेंडर खुलने की सूचना तक नहीं दी गई और जब उन्हे इस बार में पता चलता और वह कोठी बने तो वह कोठी पहुंचे। 

उस समय उन्हे कोठी के अंदर जाने की अनु‌मति भी नहीं दी गई। ऐसे में ठेकेदारों के आरोप है कि दि सिरसा राधे कोपरेटिव, दि कंवरपुरा फर्म,दी सिरसा सरस्वती, गुरू कृपा,  दि सिरसा अंकुश,  दी सागर सोसाइटी के टेंडर खोले गए। धरना दे रहे ठेकेदारों के आरोप है कि इन फर्म संचालकों ने अधिकारियों को पैसों देकर टेंडर अलॉट करवाएं हैं।

सिरसा में पहले भी 528 गलियों की चल रही है विजिलेंस जांच

नगर परिषद में टेंडर धांधली में कई बार आ चुका है। ऐसा मामले पहले भी सामने आ चुके है। कुछ साल पहले 528 गलियों के टेंडर लगाए थे। जिसकी अभी तक विजिलेंस जांच है। इसमें कई ऐसी गलियां थी, जिनकी फिजिबिल्टी रिपोर्ट सही थी, लेकिन कागजों में उन्हें दोबारा से बना दिया गया। नगरपरिषद में ठेकेदार आपस में पहले से ही पैसों का लेने कर टेंडर भरते हैं।

यह पूरा मामला मेरे ध्यान में हैं।  मैंने जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया है। अभी कमेटी की जांच जारी है।

-संगीता तेतरवाल, जिला नगर आयुक्त।