प्रशासन के पीले पंजे ने 14 परिवारों के घर तोड़े, जानिए कारण

सिरसा। जिले के गांव बप्पां में 14 मकानों पर चले प्रशासन के पीले पंजे के बाद परिवार बेघर हो गए। परिवारों ने खुले आसमान के नीचे रात बिताई। टूटे घरों को देख देख परिवार के लोग अपनी आंखे नम कर रहे थे। परिवार के किसी ने खाना खाया तो किसी ने नहीं। लोग अपने टूटे मकानों को देख देख भावुक होते रहे और मन ही मन प्रशासन को कोसते रहे। लोगों में इस बात को लेकर रोष देखा गया कि वोट लेने के लिए तो सब आ जाते हैं लेकिन इस समय कोई उनकी सहायता करने के लिए कोई नहीं आया। 


गांव बप्पा के माेहल्ले के सभी लोग दिहाड़ीदार मजदूर हैं। दिहाड़ी कर के ही वह अपने परिवार का पालन पोषण करते है। मकान टुटने के अगले दिन माेहल्ले का कोई भी व्यक्ति मजदूरी करने नहीं गया सभी अपने अपने परिवार को हौसला बढ़ रहे थे। अशियाना टूटने पर अपने मां-बाप को रोता देख उनके बच्चे भी स्कूलों में नहीं गए। 

लोग अपने टूटे मकानों को देखकर कभी सरकार को तो कभी प्रशासन को व कभी गांव के सरपंचों को कोसते रहे। माेहल्ले के जोगिंद्र सिंह ने बताया कि जब उसका घर तोड़ा गया था उस समय वह मजदूरी गया हुआ था। जिन परिवारों के मकान टूटे उनमें से जोगिंद्र सिंह के अनुसार उसके पास मकान के नाम पर सरकंडे डले हुए दो कमरे थे। प्रशासन के इस पिले पंजे ने उसके दोनों ही मकान टोड़ दिए। 

उसका कहना है कि वह पत्नी व अपने दो बच्चों को लेकर कहा सिर छुपाएगा। जोगिंद्र सिंह ने उस रात अपने बच्चों के साथ गली में खुले आसमान के नीचे रात बिताई । जोगिंद्र व उसकी पत्नी ने रोते हुए बताया कि घर में चूल्हा भी नहीं बचा। बच्चों ने तो खाना खा लिया था, लेकिन उन दोनों ने न ही तो खाना खाया और न ही उन्हें रातभर नींद आई। वहीं माेहल्ले के अन्य लोगों ने बताया कि सरकार व प्रशासन ने उन्हें बेघर कर दिया। लोगों ने दुखी मन से कहा कि उनके पास भूमि खरीदना तो दूर तंबू गाड़ने तक के पैसे नहीं है। उन्हें समक्ष नहीं आ रहा कि वह अब क्या करे। 

गांव सरपंच बिमला सरावता का कहना है कि ये केस मेरे कार्यकाल से पूर्व सरपंच के समय का था। जिसमें अब फैसला पंचायत के हक में आ गया। मेरे पास अब सरपंच पद का चार्ज नहीं है। ये जो भी कार्रवाई है वो बीडीपीओ कार्यालय की तरफ से ही की गई है।