टिकरी कांड के बहाने किसान आंदोलन को बदनाम करने की साजिश का पर्दाफाश

पीड़िता के पिता ने कहा जब शिकायत दो के खिलाफ दी तो छह के खिलाफ कैसे हो गया मामला दर्ज

कुलदीप श्योराण

टिकरी बॉर्डर। खरी खरी न्यूज़ ने आज सुबह मुरथल कांड की तरह टिकरी कांड को किसान आंदोलन को बदनाम करने का जो अंदेशा जताया था वह शाम होते होते सच साबित हुआ है।
आज शाम को टिकरी कांड में पीड़िता के पिता ने मीडिया से बातचीत करते हुए पुलिस और प्रशासन पर सवालिया निशान खड़ा करते हुए कहा कि जब उन्होंने 2 लोगों के खिलाफ शिकायत दी थी तो छह के लोगों के खिलाफ मामला f.i.r. कैसे दर्ज कर दी गई‌। उन्होंने कहा कि 4 लोगों ने तो उनकी बेटी की मदद की थी, ऐसे में उन्हें फंसाने का काम पुलिस ने क्यों किया यह उनकी समझ से बाहर है। उन्होंने अंकुर, जगदीश, कविता और योगिता को बेकुसूर बताते हुए पुलिस में दोबारा से अपनी ओर से लिखित में बयान भी दर्ज कराया है।

पीड़िता के पिता के बयान से जाहिर है कि "बड़े" ऊपरी दबाव के चलते पुलिस प्रशासन ने किसान आंदोलन को बदनाम करने के मकसद से 6 लोगों के खिलाफ बिना किसी जांच के तुर्ता-फुर्ती में एफ आई आर दर्ज कर दी।

इस मामले में आरोपित अनूप चानौत ने भी मीडिया को बताया कि सिर्फ एक व्यक्ति के खिलाफ छेड़खानी की शिकायत आई थी जिसे संगठन से तुरंत बाहर कर दिया गया था। इसके बाद पांच और लोगों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज करना पूरी तरह से किसान आंदोलन को बदनाम और कमजोर करने की साजिश का हिस्सा है।

पीड़िता के पिता के बयान और आरोपित अनूप चानौत की बातों ने यह साफ कर दिया है कि सरकार लंबे समय से किसान आंदोलन की छवि धूमिल करने के लिए जो बहाना ढूंढ रही थी वह उसे टिकरी कांड की एक शिकायत के जरिए नजर आया और उसने उसे दोनों हाथों से लपकते हुए तिल का ताड़ बनाते हुए सनसनीखेज गैंगरेप कांड का अमलीजामा पहना दिया।

गोदी मीडिया ने भी अपने आकाओं के इशारे पर मामले को इतना सनसनीखेज और संगीन बना दिया कि किसान आंदोलन को एक ही दिन में चौतरफा आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।

बड़ी बदनामी के कारण किसान नेताओं के भी होश उड़ गए और उन्होंने मामले की तह में पूरी तरह जाने के बजाए पुलिस की एफ आई आर के बलबूते पर ही सभी छह युवाओं को मामले में शामिल मानते हुए उन्हें कड़ी सजा दिलाने की मांग कर दी। उन्हें भी नहीं पता था कि वह 6 महीने से उनके साथ कंधे से कंधा मिला रहे चार बेकसूर युवाओं को बिना वजह अपराधी करार दे रहे हैं।

एक बड़े गोदी मीडिया अखबार ने दो 6 सामान्य घरों के लड़के,लड़कियों को किसान नेताओं का दर्जा देते हुए पूरी किसान आंदोलन की अगुवाई कर रही नेताओं की जमात को ही कटघरे में खड़ा करने में कोई कोताही नहीं बरती।

दैनिक जागरण ने इसे राष्ट्रीय आपदा की तरह दिखाते हुए लगभग 2 पेजों में अनाप-शनाप खबरें छापते हुए इस पूरे मामले को मुरथल कांड की तरह बेहद कलंकित और गिरा हुआ साबित करने में एड़ी से चोटी तक का जोर लगा दिया। पीड़िता के पिता के बयान ने साफ कर दिया कि उन्हें सिर्फ 2 लोगों के खिलाफ शिकायत दी थी बाकी चार लोगों के खिलाफ किस तरह से पुलिस ने बिना किसी जांच के, बिना किसी शिकायत के दर्ज किया यह पुलिस और सरकार की मंशा पर सवालिया निशान खड़ा करने के लिए काफी है।

जाहिर सी बात है कि किसान आंदोलन को किसी भी तरह से कमजोर कर पाने और डिगा पाने में नाकाम रही सरकार ने इस शिकायत की आड़ में पूरे किसान आंदोलन और सभी किसान नेताओं को उसी तरह बदनाम करने का षड्यंत्र रच दिया जिस तरह से जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान फर्जी मुरथल कांड के जरिए पूरी जाट कौम को पूरी दुनिया में बदनाम करने का काला कारनामा गाया गया।

मुरथल कांड की तरह टिकरी छेड़छाड़ मामले को गैंगरेप का दर्जा देकर पूरे किसान आंदोलन की 6 महीने की तपस्या को मिट्टी में मिलाने के लिए पुलिस, सरकार और गोदी मीडिया ने कोई कसर नहीं रखी लेकिन अब यह साफ हो गया है कि यह मामला गैंगरेप का नहीं होकर बल्कि एक या दो व्यक्तियों की नीच हरकत से संबंधित है और इसे जानबूझकर पुलिस ने गैंगरेप का नाम दिया है।

किसान आंदोलन को फेल करने की साजिश के तहत इसे गैंगरेप का नाम दिया गया और बेकसूर युवाओं को संगीन आरोपों के तहत आरोपी बनाने का काम किया गया।

खरी खरी न्यूज़ के पास भी इस बात का सबूत है कि पीड़िता के पिता ने सिर्फ 2 लोगों के नाम ही अपनी शिकायत में लिखवाए थे बाकी लोगों का उनकी लिखित शिकायत में कोई नाम नहीं था। 4 लोगों के नाम केवल कोलकाता जाने और लड़की के साथ वापस आने के तौर पर लिखे गए थे लेकिन पुलिस ने पूरी किसान बिरादरी को कलंकित करने और 2 लोगों के खिलाफ शिकायत को छह लोगों के गैंगरेप का दर्जा देकर पूरे मामले को बेहद सनसनीखेज बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यह सारी कवायद किसान आंदोलन और किसान नेताओं को बदनाम और कलंकित करने के लिए रची गई थी और आज इसका पर्दाफाश हो गया है।

Courtesy : Khari Khari News