सांस की कठिनाइयों में लाभकारी है प्रोनिंग प्रक्रिया - केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय

होम आइसोलेट कोरोना संक्रमितों के प्रोनिंग प्रक्रिया काफ़ी लाभकारी साबित हो सकती है। घर पर ही कोरोना का उपचार ले रहे मरीज प्रोनिंग व्यायाम के जरिए सांस लेने में कठिनाइयों को दूर कर सकते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने यह जानकारी देते हुए बताया कि कुछ खास तरीके अपनाकर कोई भी अपना ऑक्सीजन लेवल मेंटेन रख सकता है। 



प्रोनिंग एक तरह की प्रक्रिया है, जिसमें मरीज को पेट के बल लेटना होता है इस प्रक्रिया में पेट के बल लेटने से श्वसन कोशिकाओं को खोलकर आसानी से सांस लेने में मदद मिलती है। ऐसे होम आइसोलेशन के मरीज जिनका ऑक्सिजन स्तर 94 से नीचे है, वे इस प्रक्रिया को अपना सकते हैं। प्रक्रिया के दौरान एक तकिया मरीज की गर्दन के नीचे रखें, एक या दो तकिये छाती और जांघ के ऊपरी हिस्से के बीच रखें तथा दो तकिये पैर की पिंडलियों के नीचे रखें। लेटने की पोजिशन में नियमित रूप से बदलाव करते रहना होगा और किसी भी पोजिशन पर 30 मिनट से ज्यादा का समय न लगाएं। 


सबसे पहले 30 मिनट से 2 घंटे तक पेट के बल लेटें, 30 मिनट से 2 घंटे तक दाईं करवट से लेटें, 30 मिनट से 2 घंटे तक शरीर के ऊपरी हिस्से को ऊपर उठाएं और बैठ जाएं, 30 मिनट से 2 घंटे तक बाईं करवट से लेटें तथा फिर से पहले वाली पोजिशन पर वापस लौटें और पेट के बल लेटें।

कब ना करें प्रोनिंग

प्रेगनेंट महिलाएं या कोई मेजर कार्डिएक कंडीशन है या शरीर में स्पाइनल से जुड़ी कोई समस्या या फ्रैक्चर हो तो इस प्रक्रिया को न अपनाएं। खाना खाने के बाद तुरंत बाद यह प्रक्रिया न अपनाएं। जब तक सहने योग्य हो, तभी तक यह प्रक्रिया करें।