कपास की खेती करने वाले किसानों के लिए कृषि विश्वविद्यालय हिसार ने जारी की एडवायजरी

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कपास अनुभाग द्वारा 15 से 30 जून तक कपास की खेती के लिए सुझाव दिए गए है। जून माह में किसान भाई कपास की एक खोदी कसोले से या ट्रैक्टर की सहायता से अवश्य करें। कपास में खुला पानी 45 से 50 दिन बाद ही लगाएं। रेतीती मिट्ट में भी फव्वारा विधि से 4-5 दिन में ही पानी लगाएं रोज फव्वारें ना चलाएं। टपका विधि के द्वारा भी पानी 3-4 दिन में ही लगाएं। बरसात के बाद अगर खेत में जलभराव हो गया है तो खेत से जल निकासी का उचित प्रबंध करें। अच्छी बरसात के बाद ही यूरिया का एक बैग प्रति एकड़ के हिसाब से उपयोग करें।


रोग प्रबंधन

बीमारी से सूखे हुए पौधों को उखाड़ दे ताकि बीमारी को आगे बढने से रोका जा सके। जड़ गलन रोग से प्रभावित पौधों के आसपास के स्वस्थ पौधों में कार्बेडाजिम (2 ग्राम प्रति लीटर का घोल) बनाकर 400 से 500 मिलीलीटर जड़ों में डालें।

कीट प्रबंधन

कपास की फसल में चूरड़ा, सफेद मक्खी एवं हरा तेला की संख्या की साप्ताहिक अंतराल पर निगरानी रखे। कपास की फसल के साथ भिंडी की खेती ना करें ऐसा करने से रस चूसने वाले कीड़ों की संख्या बढ़ती है। जून माह में कपास की फसल में थ्रिप्स या चूरड़ा का प्रकोप सामान्यत: देखा जाता हैं। थ्रिप्स की संख्या 10 या अधिक प्रति पत्ता पहुंचने पर ही सिफारिश किए गए कीटनाशकों का प्रयोग करें। थ्रिप्स के लिए किसी भी ज्यादा जहरीले कीटनाशक या कीटनाशकों के मिश्रण का प्रयोग ना करें।

आवश्यकता पडऩे पर पहले 2-3 स्प्रे के लिए नीम आधारित कीटनाशकों जैसे निम्बीसीडीन या अचूक की एक लीटर मात्रा को 150-200 लीटर पानी प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें। कपास की फसल में प्रयोग किए गए सभी कीटनाशकों एवं फफूंद नाशकों की संपूर्ण जानकारी का लेखा जोखा रखें। हरियाणा कृषि विश्विद्यालय के कृषि मौसम विभाग द्वारा समय-समय पर जारी मौसम पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर ही कीटनाशकों एंव फंफूदनाशकों को प्रयोग करें।