किसान फसल विविधीकरण को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं

उपायुक्त महावीर कौशिक ने बागवानी विभाग द्वारा जिला में किसानों के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का निरीक्षण किया। उपायुक्त ने गांव गिल्लाखेड़ा में किसानों द्वारा की जा रही बागवानी खेती, विभिन्न बागों का दौरा किया व बाग में लगे सूक्ष्म सिंचाई संयंत्र का भी निरीक्षण किया। उपायुक्त ने किसानों से बागवानी से हो रही आमदनी के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।

उपायुक्त ने किसान आनंदवीर व मौके पर उपस्थित अन्य किसानों से पानी भंडारण टैंक, सूक्ष्म सिंचाई तकनीक, नैट हाऊस, पोली हाऊस, अमरूद के पौधों की नर्सरी, किन्नु, अनार, अमरूद व पपीते के बाग के बारे में विस्तार से जानकारी ली। किसानों ने बताया कि बागवानी विभाग द्वारा इन सभी योजनाओं पर अनुदान दिया गया है। 

उपायुक्त ने कहा कि सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही है जिसको किसान अपनाकर ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। बागवानी विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न स्कीमों का निरीक्षण करते हुए कहा कि फसल विविधीकरण को अपनाकर किसान अपनी आमदनी को बढ़ा सकते हैं और पानी की बचत के साथ-साथ भूमि की उर्वरा शक्ति को भी बचाया जा सकता है।

इस मौके पर टपका सिंचाई प्रणाली के बारे में जिला उद्यान अधिकारी डॉ. कुलदीप श्योराण ने बताया कि टपका सिंचाई संयंत्र लगाने पर विभाग द्वारा 85 प्रतिशत अनुदान राशि दी जाती है और टपके-टपके सिंचाई से पानी की बचत के साथ-साथ खाद व लेबर की बचत की जाती है। 

इस विधि से 60 से 70 प्रतिशत पानी की बचत होती है और फसलों की पैदावार भी 50 से 60 प्रतिशत ज्यादा मिलती है। खाद व दवाई का प्रयोग भी इस विधि से पानी के साथ किया जा सकता है, जिससे वातावरण भी प्रदूषित नहीं होता है। 

खुला पानी लगाने से जमीन में जो सूक्ष्म तत्व मौजूद होते हैं वो पानी के साथ नीचे चले जाते हैं और पौधों को सूक्ष्म तत्वों की कमी हो जाती है जिसके कारण पौधों की बढ़वार व पैदावार पर असर पड़ता है। 

किसानों को सामुदायिक तालाब पर 100 प्रतिशत, किन्नु बाग पर 4800 रुपये, अमरूद के बाग पर 4600 रुपये व अनार के बाग पर 6360 रुपये प्रति एकड़ दिया जा रहा है। विभाग द्वारा दिये जा रहे अनुदान के कारण गांव गिल्लाखेड़ा व आस-पास के गांव में लगभग 400 एकड़ के आस-पास अमरूद व किन्नु के बाग किसानों द्वारा लगाये गये हैं।