भगवान वाल्मीकि जी की शिक्षाएं सभी समाज के लिए प्रासंगिक : सांसद




सांसद सुनीता दुग्गल व विधायक दुड़ाराम ने श्री वाल्मीकि धर्मशाला में 5 लाख रुपये की लागत से नव निर्मित दो कमरों का किया उद्घाटन

फतेहाबाद, 20 अक्टूबर।

सिरसा लोकसभा क्षेत्र की सांसद सुनीता दुग्गल ने कहा कि भारत संत महात्माओं की पावन पवित्र भूमि हैं। यहां समय-समय पर ऋषि-मुनियों ने मानव जाति के कल्याण के लिए संदेश दिया है। सांसद बुधवार को भगवान वाल्मीकि जयंती के अवसर पर स्थानीय वाल्मीकि मंदिर में आयोजित कार्यक्रम को बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रही थी। इस मौके पर सुनीता दुग्गल ने सांसद निधि कोर्ट से स्थानीय श्री वाल्मीकि धर्मशाला में 5 लाख रुपये की लागत से नव निर्मित दो कमरों का उद्घाटन किया। इसके उपरांत सांसद व विधायक ने झांकी (शोभा यात्रा) को झंडी दिखाकर रवाना किया। इससे पूर्व उन्होंने कबीर धर्मशाला में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की और नागरिकों की शिकायतें भी सुनी। वाल्मीकि आश्रम में भंडारे आयोजन में भाग लिया।


सांसद सुनीता दुग्गल ने कहा कि भगवान वाल्मीकि ने रामायण की रचना से समाज को सही रास्ता दिखाने का काम किया है। भगवान वाल्मीकि का जीवन हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी शिक्षाएं सभी समाज के लिए प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि हमें समाज में व्याप्त असमानता के भाव को दूर करना होगा तभी सभ्य समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि महापुरुषों की जयंती समारोह से समाज में सुधार का संदेश दिया जाता है, जिसका बीड़ा प्रदेश सरकार ने उठाया है। प्रदेश सरकार द्वारा भी सभी महापुरुषों की जयंती सरकारी खर्च पर मनाकर समाज में समरसता की भावना को प्रबल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी के साथ मिलकर चलने से ही समाज आगे बढ़ता है। सांसद ने कहा कि भगवान वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से एक आदर्श भाई, आदर्श पिता और आदर्श पत्नी धर्म की पालना करने का संदेश दिया जो सबसे जरूरी है। उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करें और हम कदम पर उनका हौंसला बढ़ाएं। 

इस मौके पर विधायक दुड़ाराम ने कहा कि महापुरूष किसी एक समाज के नहीं होते बल्कि वे सभी समाज के लोगों के लिए पथप्रदर्शक और मार्गदशक होते हैं। उन्होंने कहा कि संतों, महात्माओं और महापुरूषों की वजह से ही भारत देश की पहचान पूरे विश्व में बनी है। वर्तमान सरकार ने प्रत्येक महापुरुष की जयंती को भव्य तरीके से सरकारी स्तर पर मनाने की परंपरा शुरू की है। इतना ही नहीं, सरकार ने शिक्षण संस्थाओं का नामकरण भी महापुरुषों के नाम पर करना शुरू किया है ताकि उनकी यादों को जीवंत रखा जा सके। प्रदेश में सभी को जातिवाद से ऊपर उठकर हरियाणा एक-हरियाणवी एक की भावना को अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार ने ईमानदारी से अपना फर्ज निभाया है, प्रदेश से भ्रष्टाचार को खत्म करने की नई पहल की है। 

उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान, कठोर तप व त्याग की भावना से परिपूर्ण भगवान महर्षि वाल्मीकि जी एक महान ऋषि बने, जिन्होंने अपने दिव्य ज्ञान से पवित्र ग्रन्थ रामायण की रचना कर अपनी भविष्य की पीढिय़ों को धर्म, आध्यात्मिकता व चरित्रवान बनने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हमारा देश ऐसे ही महान ऋषियों के जीवन और उनकी अमूल्य शिक्षाओं की मजबूत नींव पर स्थापित है। विधायक ने कहा कि हम सभी को भगवान वाल्मीकि के दिखाए मार्ग पर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने सर्वसमाज विशेषकर वंचित वर्ग के लोगों के उत्थान के लिए अनेक कल्याणकारी नीतियों व कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक लागू किया है। इन नीतियों व कार्यक्रमों का व्यापक असर हुआ है और वंचित वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने ही सभी संत महापुरूषों की जयंती मनाने का जो निर्णय लिया है, दूसरे राज्य भी उसका अनुसरण कर रहे हैं। इस अवसर पर प्रधान प्रेमरति, उपास भट्टी, शम्मी रति, विधा रति, जोनी रति, प्रधान जिले सिंह गुरिया, राजेश खटक, संदीप सुरलिया, राज सोलंकी, प्रताप सिहाग, नरेश टिट्टू, नरेश सरदाना, कृष्ण डाबला, प्यारे लाल कायत, पटेल सोनी, ओपी चड्ढा, सोमपाल, आदि मौजूद रहे।