गुलाबी सुंडी के बचाव के लिए कृषि विशेषज्ञों ने दी किसानों को हिदायतें

 

-किसानों को कीटनाशकों के छिडक़ाव बारे विशेषज्ञों ने दी राय

फतेहाबाद, 6 अक्टूबर।

उपायुक्त महावीर कौशिक ने बताया कि खरीफ सीजन 2021 के दौरान जिला फतेहाबाद में 63200 हेक्टेयर में कपास फसल की कास्त की गई है, जिसमें लगभग 60 प्रतिशत क्षेत्र में गुलाबी सूंडी का प्रकोप देखा गया है। कपास एक महत्वपूर्ण रेशे वाली नकदी फसल है। पिछले कुछ वर्षों से मध्य व दक्षिणी भारत में बीटी कपास में गुलाबी सूंडी के प्रति प्रतिरोधी क्षमता कम होने के कारण इसका प्रकोप देखा गया है। परन्तु वर्ष 2018-19 के दौरान उतरी भारत में गुलाबी सूंडी का प्रकोप पहली बार जिला जीन्द की कपास मीलों के आसपास देखा गया, जांच पड़ताल के बाद पता चला कि इस क्षेत्र में गुलाबी संूडी के प्रकोप का मुख्य कारण दक्षिण भारत के राज्यों से लाए गए बिनौले के साथ प्रतिरोधी गुलाबी सूंडी (लार्वा) के आने से हुआ।

उपायुक्त ने बताया कि वर्ष 2018-19 के दौरान इसका प्रकोप केवल कपास जीनिंग मीलों व बिनौले से तेल निकालने वाली मीलों के आसपास देखा गया था, परन्तु इस वर्ष मीलों के दूर खासकर जिन किसानों ने पिछले साल की कपास की लकडिय़ों का ढेर अपने खेत में लगा रखे हैं वहां पर प्रकोप ज्यादा देखने को मिला है। गुलाबी सूंडी कपास फसल में मध्य एवं अन्तिम अवस्था में नुकसान पहुंचाती है। सूंडी टिण्डे के अन्दर से अपना भोजन ग्रहण करती है जिससे कपास फसल की पैदावार व गुणवत्ता पर बहुत विपरित प्रभाव पड़ता है।

गुलाबी सूंडी की पहचान व आर्थिक कगार:-

विशेषज्ञों के अनुसार गुलाबी सूंडी के प्रकोप को पहचानने के लिए खेत में लगाए गए फेरोमोन ट्रेप, रोजेट  फूल (गुलाब की शक्ल) या हरे टिण्डों को खोल कर देखना जरूरी है। यदि खेत में लगाए गए फेरोमोन ट्रेप में 8 प्रोढ़ पतंगे प्रति फेरोमोन ट्रेप में लगातार 3 दिन तक मिले या खेत में कपास के पौधों पर लगे हुए 100 फूलों में से 10 फूल गुलाब की तरह (रोजेट फूल) बंद दिखाई देते हैं तथा इन फूलों को खोलने पर इनमें गुलाबी सूंडी या इसके द्वारा बनाया हुआ जाल दिखाई पड़ता है या 20 हरे टिण्डों (10-15 दिन पुराने बड़े आकर के) को खोलने पर टिण्डों में गुलाबी या सफेद लार्वा दिखाई दे, तो गुलाबी सूंडी को नियन्त्रण करने की जरूरत है।

नियन्त्रण के लिए कीटनाशकों की सिफारिश:-

कृषि विशेषज्ञों की सलाह अनुसार गुलाबी संूडी के लिए पहला छिडक़ाव 800 मीली लीटर प्रोफनोफोस 50 ईसी या 900 ये 1100 मीली लीटी क्यूनालफोस 20 एएफ या 250 से 300 ग्राम थायोडिकाई 75 डब्ल्यूपी प्रति 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से छिडक़ाव करें। इसका छिडक़ाव 80-100 मीली लीटर साइपरमेथ्रिन 25 ईसी या 160 से 200 मीली लीटर डेकामेथरीन 2.8 ईसी को 200 लीटर पानी में घोल बनाकर एक एकड़ में 10-12 दिनों के अंतराल पर आवश्यकतानुसार स्प्रे करें।

गुलाबी सूंडी का प्रबन्धन:-

फसल के दौरान:-

गुलाबी सूंडी के प्रकोप की निगरानी व नियन्त्रण के लिए 2 फेरोनोन ट्रेप प्रति एकड़ की दर से फसल में लगाएं। गुलाबी सूंडी के प्रकोप की निगरानी के लिए प्रतिदिन सुबह-शाम खेत का निरीक्षण करते रहें। गुलाबी सूंडी से प्रभावित नीचे गिरे टिण्डों, फूल डोडी व फूल को एकत्रित कर नष्ट कर दें। जिस खेत में गुलाबी संूडी का प्रकोप न हुआ हो, उस कपास को अलग से चुगाई करें व अलग ही भण्डारण करें। जिस खेत में गुलाबी सूंडी का प्रकोप हुआ हो उस कपास में विराजमान सूंडियों को खत्म करने के लिए अच्छी तरह से भण्डारण करके उपचारित करें। कपास की चुगाई व छंट्टियों/लकडिय़ों की कटाई आर्थिक लाभ के हिसाब से जितना जल्दी हो सके कर लेनी चाहिए। इसके लिए कपास की फसल में अन्तिम सिंचाई सितंबर माह के अन्त तक अवश्य कर दें। ऐसा करने से फसल के टिण्डों को होने वाली नुकसान भी कम हो जाएगा। कपास की अन्तिम चुगाई के बाद खेत में बचे अधखिले व खराब टिण्डों को नष्ट करने के लिए खेत में भेड़, बकरी आदि जानवरों को चरने दें। कपास के अवशेष व आंशिक खुले टिण्डों को नष्ट कर देना चाहिए। कपास की लकडिय़ों को छाया में खेत में ना इक_ा करें। कपास की लकडिय़ों को जमीन पर पीटे ताकि इनमें छिपे गुलाबी सूंडी के लार्वा नीचे जाए और छंट्टियों/लकडिय़ों को जमीन वा लम्बवत खड़ा करें। गुलाबी सूंडी के प्रकोप वाले क्षेत्रों से नए क्षेत्र में कपास की लकडिय़ों को नहीं ले जाना चाहिए। एक ही कीटनाशक का छिडक़ाव बार-बार नहीं करना चाहिए।

फसल कटनें के पश्चात:-

कपास उत्पादन के हित धारकों जैसे किसान, कृषि उत्पाद विक्रेता, कपास मीलों के मालिक, फेरोमोन ट्रेप उत्पादक व बीज उत्पादक कम्पनियां आदि के लिए एक बहुत बड़ें स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर उनको अपने-अपने क्षेत्र में कार्य करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। दक्षिण व मध्य भारत के कपास उत्पादक क्षेत्रों से कपास/बिनौला को उतरी क्षेत्र में नहीं लाना चाहिए। जिस कपास की फसल में गुलाबी सूंडी का प्रकोप हुआ हो उस कपास को घरों या गोदामों में भंडारित नहीं करना चाहिए। जीनिंग मील में रखे कपास के बिनौले या बीज को मार्च महीने के अन्त तक कपास मीलों से हटा देना चाहिए और जो कपास का बीज प्रयोग में आने से रह जाता है, उसे अपै्रल महीने में सेल्फास 3 ग्राम/यानि एक गोली/प्रति घन मीटर के हिसाब से 48 घंटों तक धूमित करना चाहिए। पशुओं को खिलाने के लिए केवल कपास की खली (केक) ही रखें और इस उद्देश्य के लिए कपास के बीज (बिनौले) को नहीं रखना चाहिए। मीलों में जीनिंग (रूई पिनाई) प्रक्रिया के दौरान निकले कचरे को खत्म कर देना चाहिए।